Nexgen पूरे देश में लगाएगी 1000 CNG और सीबीजी-कम्प्रेस्ड बॉयोगैस पंप, जानें खास बातें

पराली जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की समस्या का एक समाधान लाते हुए नेक्सजेन एनर्जिया लिमिटेड ने देश में एक हजार सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट लगाने की घोषणा की है। कंपनी पंजाब में तीन, हरियाणा में दो और यूपी में पांच प्लांट लगाना शुरू कर चुकी है। नेक्सजेन एनर्जिया लिमिटेड के एमडी डॉ.पीयूष द्विवेदी ने बताया कि कंपनी इस प्रोजेक्ट में 100 करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी है और कुल 400 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि अंबाला, हरियाणा में हमारा पहला सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट उत्पादन शुरू करने के स्तर पर आ गया है और वहीं से हम अपने सीएनजी पंपों को सप्लाई शुरू करेंगे। अंबाला प्लांट से 5 टन सीएनजी गैस का उत्पादन शुरू कर दिया गया है और इसे 10 टन तक बढ़ाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों से पराली खरीदी जाएगी और उनकी एक बड़ी समस्या का समाधान किया जाएगा। साथ ही कंपनी किसानों को किफायती दरों पर जैविक खाद भी उपलब्ध करवाएगी। 

डॉ.पीयूष द्विवेदी ने बताया कि सबसे पहले जींद, बागपत, अंबाला, खुर्जा, फतेहाबाद में पंप लगाए जा रहे हैं और उनका काफी काम हो चुका है। उनको मार्च, 2022 तक चालू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी अब तक देश के प्रमुख हिस्सों में 150 पंप लगाने के लिए करार कर चुकी है और उन पर विभिन्न स्तरों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले पांच सालों में हम देश में 10हजार से अधिक सीएनजी पंप लगाएंगे। इन सभी पंपों को हम अपने सभी 1000 प्रोडक्शन यूनिट्स से सीएनजी गैस की सप्लाई करेंगे। एक तरह से पूरा सप्लाई और सेल नेटवर्क बना कर ग्राहकों को सीधे सप्लाई होगी। इससे हम कंपनी संचालन खर्च को भी नियंत्रण में रखने में कामयाब होंगे।

डॉ.द्विवेदी ने बताया कि सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट लगाने के लिए एक से डेढ़ एकड़ जगह लगती है। इसके अलावा कचरा और पराली से गैस तैयार करने की हमारी तकनीक के साथ गैस तैयार की जाती है। कंपनी इन सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट्स को पूरे देश के अलग अलग हिस्सों में स्थापित कर रही है ताकि पंपों को काफी नजदीक से गैस की आपूर्ति की जा सके।

उन्होंने बताया कि सीएनजी पंप लगाने के लिए 13 अलग अलग विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है, पूरी प्रक्रिया में लगभग एक साल का समय लग जाता है। सबसे अधिक समय इसी प्रोसेस में लगता है। हमने एक कंसल्टेंट फर्म को अपने साथ जोड़ा है जो कि इन सभी विभागों के साथ तालमेल में सभी प्रकार की अनुमति प्राप्त करने के लिए काम करती है। उन्होंने माना कि सभी आवेदकों के लिए इस तरह से अलग अलग तरह की अनुमति प्राप्त करना आसान नहीं है, इसलिए हमने अपनी तरफ से ही ये प्रयास किया है।

1.5 से 1.8 करोड़ रुपए आएगी लागत

प्रत्येक सीएनजी पंप लगाने में 1.5 से 1.8 करोड़ रुपए की लागत आएगी। जिसमें हम सभी तरह की मशीनें और अन्य डिवाइसेज लगाएंगे। फ्रैंचाइज को कैपिटल, इंफ्रास्ट्रक्चर और जमीन का प्रबंध करना होगा। कंपनी मार्केटिंग, वेंडर ट्रेनिंग और सप्लाई आदि में मदद करेगी। द्विवेदी ने बताया कि सरकार भी इस प्रयास को काफी समर्थन कर रही है और आने वाला भविष्य इसी का है। कंपनी के पास आवेदकों की संख्या बढ़ती जा रही है और हम जल्द ही अपने शुरुआत लक्ष्यों को हासिल करने के करीब होंगे।

पंजाब और हरियाणा के किसानों से खरीदेंगे पराली

श्री द्विवेदी ने बताया कि सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट के लिए हम पंजाब और हरियाणा और अन्य राज्यों में किसानों से पराली खरीदेंगे। इससे पंजाब में किसानों को पराली के भी दाम मिलेंगे और वे इसको जलाने के कारण होने वाली परेशानी से बच जाएंगे। इससे पर्यावरण को भी काफी हद तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा में पराली एक काफी बड़ी समस्या बन चुकी है और हम आने वाले समय में किसानों से पराली का अधिकांश हिस्सा खरीद कर उनकी समस्या का हल कर देंगे।

किसानों को जैविक खाद भी देंगे

श्री द्विवेदी ने बताया कि सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट में पराली और कचरे से सीएनजी गैस बनाने के प्रोसेस में जैविक खाद भी मिलेगी। हम वह खाद किफायती कीमत पर किसानों को बेचेंगे। इससे किसानों को महंगी खादों से छुटकारा मिलेंगे और वे अपने खेतों में जैविक खाद डालकर बेहतर आर्गेनिक उपज भी प्राप्त कर पाएंगे। इस पूरे प्रोसेस में कंपनी से लेकर किसानों और सरकार से लेकर पर्यावरण, सभी का फायदा होगा। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य को होने वाले कई तरह के जोखिमों को भी इस प्रोजेक्ट से दूर किया जा सकेगा। 

प्रति प्लांट में 100 टन कूड़ा प्रोसेस होगा 

कंपनी द्वारा लगाए जानेवाले सीएनजी (सीबीजी-कम्प्रैस्ड बॉयो गैस) प्लांट में प्रति दिन 3 टन गैस की उत्पादन क्षमता होगी। इससे आसपास के कई पंप को दैनिक आधार पर सप्लाई की जा सकेगी। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि हम शुरूआत में जिला स्तर पर और मांग के अनुसार तहसील स्तर पर भी प्लांट और पंप लगाने की योजना पर काम कर रहे हैं। अगले पांच सालों में हम अपने कई लक्ष्यों को हासिल कर लेंगे। इस प्रोजेक्ट में सरकार तय नियमों के अनुसार ग्रांट और सब्सिडी भी प्रदान करेगी।